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नहीं रहे वीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ वीआरसी, वीएसएम

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  • 28 Apr, 2026
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बीकानेर जिले के गौरव, वीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ वीआरसी, वीएसएम का 27 अप्रैल रात्रि 10:30 बजे निधन हो गया। उनके निधन से सैन्य जगत, साहित्य क्षेत्र तथा समाजसेवा से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार 29 अप्रैल 2026 को प्रातः 11:00 बजे राजपूत शांति धाम, डुप्लेक्स कॉलोनी में किया जाएगा।


ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ का जन्म वर्ष 1938 में बीकानेर जिले के  गारबदेसर गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर के सादुल स्कूल से प्राप्त की तथा उच्च शिक्षा श्री डूंगर कॉलेज, बीकानेर से हासिल की। छात्र जीवन से ही उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति की भावना प्रबल थी। इसी कारण वे एनसीसी में सीनियर अंडर ऑफिसर बने तथा बेस्ट कैडेट घोषित किए गए।

वर्ष 1961 में उन्हें भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त हुआ। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण मोर्चों पर अपनी वीरता और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में बीकानेर सीमा क्षेत्र में अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने दुश्मन के विरुद्ध सफल अभियान संचालित किए। उनके शौर्य और पराक्रम के लिए भारत सरकार ने उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया।

इसके अतिरिक्त उन्होंने कश्मीर, मिजोरम तथा अन्य आंतरिक अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे प्रसिद्ध गंगा रिसाला के कमांडर भी रहे और सेना में अपने अनुशासन, रणनीति एवं प्रेरणादायक नेतृत्व के लिए सम्मानित रहे।

सेना सेवा के साथ-साथ ब्रिगेडियर राठौड़ साहित्य और लेखन में भी विशेष रुचि रखते थे। उन्होंने कई प्रेरणादायक पुस्तकें लिखीं, जिनमें एक गोली एक दुश्मन, जीवन एक विचार, जय जंगलधर बादशाह, सनातन, एक सीमा लोकन, मरुभूमि के सूरमा दाहिर आदि प्रमुख हैं। उनकी पुस्तक एक गोली एक दुश्मन हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अत्यंत लोकप्रिय हुई तथा इसके कई संस्करण प्रकाशित हुए।

सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने अपना जीवन सामाजिक कार्यों, धार्मिक गतिविधियों और जनसेवा को समर्पित कर दिया। वे सरल व्यक्तित्व, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और प्रेरणादायक जीवन शैली के प्रतीक थे।

उनके निधन से बीकानेर सहित पूरे प्रदेश ने एक वीर सैनिक, साहित्यकार और समाजसेवी व्यक्तित्व को खो दिया है। अनेक गणमान्य नागरिकों, पूर्व सैनिकों, सामाजिक संगठनों तथा आमजन ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है।

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